डीएम ने किया सोहगरा शिवधाम मंदिर का निरीक्षण, मंगलवार से शुरू हो रहा श्रावणी मेला।

कृष्ण मोहन शर्मा, July 3, 2023

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HighLights

  • # डीएम के साथ एसडीएम,एसडीपीओ सहित कई अधिकारी थे मौजूद।
  • # इस बार चतुर्मास (मलमास) का है विशेष महत्व।
  • गुठनी

    मंगलवार से आरंभ हो रहे श्रावण मास के मौके पर सोहगरा शिवधाम में लगने वाले श्रावणी मेला के संदर्भ में डीएम मुकुल कुमार गुप्ता ने सोमवार को मंदिर का निरीक्षण किया। डीएम श्री गुप्ता जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों संग सोमवार दोपहर सोहगरा शिवधाम पहुच कर विधि व्यवस्था व श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किये गये व्यवस्था का जायजा लिया तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया।डीएम के साथ एसडीएम रामबाबू बैठा,एसडीपीओ फिरोज आलम,प्रभारी बीडीओ कुणाल कुमार,सीओ शम्भूनाथ राम, सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने मंदिर के गर्भ में जाकर विशालकाय पौराणिक शिवलिंग का दर्शन व पूजा अर्चना किया। उन्होंने मंदिर के मुख्य पुजारी अरविंद गिरी तथा बाबा हँसनाथ सेवा समिति के सदस्यों से भी व्यवस्था के संदर्भ में जानकारी ली तथा उनसे भी सुझाव लिया। श्रावण मेला में पहुचने वाले शिवभक्तों के संभावित संख्या,उनके जल भरने के स्थान,सोहगरा शिवधाम तक पहुचने वाले मार्ग सहित कई विन्दुओ जानकारी ली।

    मलमास वर्ष है 2023 का श्रावण मास,चतुर्मास में लंबा हुआ सावन।

    श्रावण का यह महीना भक्तिभाव और संत्संग के लिए होता है। जिस भी भगवान को आप मानते हैं, आप उसकी पूरे मन से आराधना कर सकते हैं। लेकिन सावन के महीने में विशेषकर भगवान शिव, मां पार्वती और श्रीकृष्णजी की पूजा का काफी महत्वपूर्ण माना गया है। हिन्दू धर्म में चतुर्मास को ही व्रतों का खास महीना कहा गया है। चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। ये 4 माह हैं- श्रावण, भाद्रपद, आश्‍विन और कार्तिक। चातुर्मास के प्रारंभ को ‘देवशयनी एकादशी’ कहा जाता है और अंत को ‘देवोत्थान एकादशी’। चतुर्मास का प्रथम महीना है श्रावण मास। हिन्दू धर्म की पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन महीने को विशेषकर देवों के देव महादेव भगवान शंकर का महीना माना जाता है। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा, तो महादेव भगवान शिव ने बताया कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया जिसके बाद से ही महादेव के लिए यह माह विशेष हो गया।